Maa

बुधवार, 23 अगस्त 2017

डाकिया

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रोज देखती आते तुमको सुबह सुबह निकल जाते सांझ तले हो घर को जाते डाकिया बाबू कहलाते तुम। मैं भी तँकती राह तुम्हारी कोई संदेश न लाते तुम ...
मंगलवार, 22 अगस्त 2017

प्रश्न

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1)प्रश्न- निरंतर-अ-प्रिय हिंदी-111111-11 परन्तु यहाँ-122 12 होगा क्या कृपया समझाए? 2)प्रश्न- कृतज्ञ-(हिंदी-112) यहाँ 121 होगा क्या आदर...
रविवार, 20 अगस्त 2017

लघुकथा संस्कृति

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संस्कृति                संस्कृति उदास थी| उसकी कोई पूछ नहीं थी| घर के कोने में पड़ी हुई थी| समय ने हाथ बढाया| आगे बढी, चल दी| सोचा, खुली हवा...
बुधवार, 9 अगस्त 2017

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#चरैवेति_चरैवेति      लघुकथा(प्रतीकात्मक शैली)                                                       न जाने कब से लहराती-बलखाती, धारा बहती...

चाक पे मिट्टी

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चाक कुम्हार मिट्टी आकार देखो जाकर जब तुम साकार मिट्टी छनी, कंकड़ हुए पार पानी के संग घुलती हर बार मारपीट को सहती गई पैरों तले रौंदी गई ...
मंगलवार, 8 अगस्त 2017

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2122     2122    212 दरमियाँ दूरी मिटाकर देखिये। फूल गुलशन में खिलाकर देखिये। है 2म1हक2ती 2धू2प 1भी 2तो2सांझ2 त1ले2 हम2स1फर2 मुझ2को2 ब1...

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कुछ रिश्ते निभाने पड़ते हैं ताउम्र भावनाओं के बिना भी क्योंकि मजबूरियों से ज्यादा कमजोरी दूसरे रिश्तों को निभाने की होती है.. निभानी पड़ती ह...
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